संक्रमित खून चढ़ाने से बच्चे को हो गया एड्स, स्वास्थ्य सचिव बोले गलती नहीं दुर्भाग्यपूर्ण घटना है

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हितेश शर्मा

 

 

दुर्ग. दुर्ग में रहने वाले सुबोध देशपांडे का बेटा जब डेढ़ साल का था तब उसे थैलीसीमिया हुआ था. लिहाजा डॉक्टरी चेकअप और खून चढ़ाने की प्रक्रिया बचपन से ही बच्चे के साथ लगातार चल रही थी.

ऐसे ही एक बार बच्चे को खून चढ़ाने की ज़रूरत पड़ने पर सुबोध देशपांडे ने BSP के हॉस्पिटल जाकर अपने बच्चे को खून चढ़वाया और इसके कुछ दिनों बाद ही यह पता चला कि उनका लाड़ला HIV से ग्रस्त हो चुका है.

मामला तकरीबन 1 साल पुराना है और पिछले महीने ही राष्ट्रीय स्तर की जांच टीम ने इस पूरे मामले की जांच की है और इस प्रकरण की जांच अब भी चल रही है.

संक्रमित खून चढ़ाने से बच्चे को हुए AIDS के संक्रमण के बारे में The Voices संवाददाता ने जब प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव सुब्रत साहू से बात की तो उन्होंने कहा कि इस मामले की दो बार जांच की जा चुकी है. उनका कहना था कि कोई भी ब्लड सैंपल बिना टेस्टिंग के इस्तेमाल नही किया जा सकता है, “एक विंडो पीरियड होता है जिसमें ऐसा कोई संक्रमण डिटेक्ट नहीं होता.” स्वास्थ्य सचिव का कहना था कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, इसमें किसी की गलती नहीं है और यह एक 1 इन मिलियन चांस वाली कंडीशन है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल राज्य के ब्लड बैंक्स में AIDS की जाँच के लिए रैपिड डाइग्नोस्टिक किट का इस्तेमाल किया जा रहा है. हांलाकि HIV इंफेक्शन का जल्द पता लगाने की ये कारगर तकनीक है लेकिन कई बार इसमें फाल्स नेगेटिव केस का पता नही चल पाता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि “अगर वेस्टर्न ब्लॉट की तकनीक को अपनाया जाता है तो विंडो पीरियड में भी AIDS का भी पता चल सकता है और इस प्रकार के केसेस से बचा जा सकता है.”

बच्चे के पिता सुबोध देशपांडे ने मामले की लीपापोती करने का आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टर्स को बचाने के लिए कई मेडिकल टर्मिनोलॉजी निकाल ली जाती है. आखिर बच्चे को एड्स हो चुका है और अब लड़ाई जारी है. सुबोध देशपांडे ने बताया कि दिल्ली से कुछ स्वयंसेवकों की टीम भी इस पूरे मामले में छानबीन कर रही है, उन्हें उम्मीद है दोषियों पर कार्यवाही ज़रूर होगी.

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