बहे एनिकट का बजट कर दिया 7 से 12 करोड़, कार्रवाई एक पर भी नहीं, जशपुर गजब है

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By तनवीर आलम
जशपुरनगर। अमूमन शासकीय कार्यों में गंभीर अनियमितता बरतने का मामला सामने आने के बाद संबंधित कार्य के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाती है। कई बार तो उन्हें बतौर सजा जेल की हवा तक खानी पड़ती है। लेकिन शासकीय अमला के लिए जशपुर एक अनोखा और मुफीद यानि अत्यधिक सुरक्षित जिला के तौर पर उभरकर सामने आया है।
दरअसल, एक योजना की बंदरबांट की हकीकत सामने आने के बाद विभाग और उनके अधिकारियों पर सवालिया निशान लग गया। उन्हें सजा के बदले पुरस्कार के तौर पर साढ़े 4 करोड़ की सौगात दी जा रही है। वह भी नियमों को ताक पर रखते हुए। बेहद ही शर्मनाक और हैरत कर देने वाले माामले का खुलासा खुद विभाग के एसडीओ ने किया है।
मामला वर्तमान में जिला मुख्यालय में समाचार पत्रों की सुर्खियों में शुमार लावा एनीकट का है। शानदार दो बार बह जाने की वजह से 7.29 करोड़ शुरूआत में और बाद में 1 करोड़ 20 लाख यानि कुल साढ़े 8 करोड़ की लागत से बने एनीकट की पोल खुल चुकी है।
बारिश के दौरान ही निर्माण कार्यों की और इंजीनियरों के कारनामों की हकीकत सामने आती है। 2017 में एनीकट के बहने का मामला सामने आने के बाद उसकी मरम्मत पूरी तरह से हुई भी नहीं थी कि एक बार इस वर्ष फिर से एनीकट का गार्डवाल बहने से भ्रष्टाचार का खुलासा हो गया।
इस मामले में कार्रवाई पर पर्दा डालते हुए उक्त कार्य के लिए अतिरिक्त 4 करोड़ की राशि सरकार से मंगाई जा रही है। यानि सजा देने के बजाए इंजीनियरों और कार्य से जुड़े लोगों को उपकृत करते हुए उन्हें सौगात दी जा रही है, वह भी बगैर रिटेंडर के। इस बात की पुष्टि खुद जल संसाधन विभाग के एसडीओ सीएस सिंह ने की है।
ब्लॉक पिचिंग के लिए 4 करोड़ की मांग
एनीकट का गार्डवाल बह जाने के बाद अनुविभागीय कार्यालय जल संसाधन विभाग के अधिकारी एसडीओ सीएस सिंह से जब पत्रकारों ने उनके कार्यालय में उनसे मुलाकात की और गुणवत्ताहीन कार्य में बरती गई लापरवाही के संदर्भ में सवाल किया, तो उन्होंने एनीकट का हिस्सा बह जाने के लिए के लिए जिम्मेदार पूरी तरह से ठेकेदार को ठहरा दिया।
उन्होंने कहा कि ठेकेदार को काम करने के लिए मना किया गया था, पर उसने इंजीनियरों की उपस्थिति के बिना ही कार्य को पूर्ण करने का प्रयास किया, जिसकी वजह से यह नतीजा निकलकर सामने आया है। उन्होंने यह भी बताया कि एनीकट में ब्लॉक पिचिंग का कार्य किया जाना है, जिसके लिए शासन को 4 करोड़ का रिवाईज स्टीमेट भेज दिया गया है। पूर्व में एनीकट बह जाने के बाद पुन: कार्य के लिए सवा करोड़ रुपए बतौर पुरस्कार की तरह दिया गया था और अब 4 करोड़ देने की तैयारी कर ली गई है।
ठेकेदार ने कहा-खुद के खर्च से बनाया हूं
एनीकट का निर्माण कराने वाली कंपनी वीवी कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार विदेश मिश्रा ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए बयान जारी किया है, कि जो गार्डवाल टूटा वो एनीकट का हिस्सा नहीं है। उसे वीवी कंपनी द्वारा स्वयं के खर्च से बनाया जा रहा है। लावा के एनीकट का निर्माण कार्य वर्ष 2013 में प्रारंभ हुआ है, जिसका निर्माण कार्य वीवी कंस्ट्रक्षन कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। उक्त निर्माण कार्य जिसके संबंध में अखबार में समाचार प्रकाशितत हुये हैं,उससे पृथक है। कंपनी के द्वारा नदी से लगे किसान धनीराम भगत के खेत को पानी के कटाव से बचाने के लिये सेवाभाव से जनहित का कार्य करने का संकल्प लिया गया। जिसमें स्वयं के खर्च से खेत से लगे नदी के तल में एक गार्डवाल बनाने का संकल्प लिया गया। उक्त गार्डवाल कंपनी के द्वारा स्वयं की लागत से कराया जा रहा था। उक्त दीवार का निर्माण कंपनी के द्वारा गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया गया था, जिसमें दीवार को जमीन के अंदर 3 मीटर तथा जमीन के उपर 5 मीटर तक निर्माण कराया जा रहा था। उक्त कार्य निर्माणाधीन है। इसी दौरान बीते दिनों लगातार 4 दिनों से हुई बारिश के कारण नदी में पानी का तेज बहाव आया। पानी के तेज बहाव में कंपनी के द्वारा बनाये गये गार्डवाल का मिट्टी कटता गया और गार्डवाल के लिये बनाये गये स्ट्रक्चर बेस तक पहुंच वहां की मिट्टी बहाकर ले गया। जिस कारण कंपनी के द्वारा सेवा भाव से स्वयं के खर्च में बनाया जा रहा गार्डवाल क्षतिग्रस्त हो गया है। विदेश मिश्रा का कहना है कि उक्त गार्डवाल को कंपनी के द्वारा पुन: गुणवत्तापूर्ण तरीके से बनवाया जायेगा। कंपनी के द्वारा उक्त क्षतिग्रस्त गार्डवाल के संबंध में विभाग को सूचना भी दी गयी है। उक्त गार्डवाल के मरम्मत से लेकर निर्माण तक की पूर्ण जवाबदेही कंपनी की है। चूंकी उक्त कार्य सेवाभाव से जनहित के लिये किया जा रहा है। अत: उक्त कार्य का उल्लेख न तो एनीकट के निर्माण वाले स्टीमेट में है और न ही उक्त कार्य की स्वीकृति है।

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