डेंगू जैसी बीमारियों के बचाव की शिक्षा स्‍कूलों में दी जाए- आईएमए

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रायपुर। डेंगू को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा है कि डेंगू की बीमारी कई तरह की होती है, और इसके उपचार के तरीके भी अलग-अलग होते है। इसलिए मरीजों को डॉक्‍टरों पर छोड़ देना चाहिए, कि वे कैसे उपचार करेंगे। सबसे जरूरी बात यह है कि बचाव के उपायों पर ज्‍यादा ध्‍यान देना चाहिए, ताकि बारिश के दिनों में डेंगू फैलने की नौबत ही न आए। इसके लिए जरूरी है कि प्राथमिक शिक्षा में ही इस तरह की बीमारियों के बचाव के उपायों को शामिल करना चाहिए, ताकि बचपन से ही लोग सजग रहें।
24 अगस्‍त को आईएमए छत्‍तीसगढ़ के अध्‍यक्ष डॉ अशोक त्रिपाठी, रायपुर ब्रांच के अध्‍यक्ष डॉ महेश सिन्‍हा, आर्इएमए हास्पिटल बोर्ड के अध्‍यक्ष डॉ.राकेश गुप्‍ता और आईएमए के सचिव डॉ.अनिल जैन ने रायपुर प्रेस क्‍लब में पत्रकारवार्ता में उक्‍त बातें कहीं।
आईएमए के पदाधिकारियों ने कहा, कि प्रदेश के सभी चिकित्‍सक चाहे वह प्राइवेट हों या सरकारी, सभी डेंगू के मरीजों का बेहतर ईलाज कर रहे हैं, लेकिन इस बीच स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री अजय चंद्राकर का तल्‍ख लहजे में निजी चिकित्‍सकों को निशाना बनाना अफसोसजनक है।
डॉक्‍टर्स ने मीडिया से भी अपेक्षा व्‍यक्‍त की, कि डेंगू को लेकर चेतना फैलानी वाली खबरों और सामग्रियों को अपने प्रोडक्‍ट में ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍थान दें।

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