अख्तर अली
सुरजपुर. शहर में बैठे हुए इस खबर को पढ़ते हुए शायद ही कोई गरीब किसान बुधराम का दर्द समझ पाए। इनके घर पर अब टूटी दीवारों, बिखरे पड़े सामानों, कुचले हुए तोहफों के सिवा कुछ नहीं जो वो शादी में अपनी बेटी को देना चाहते थे। जंगलों से आए हाथियों के झुंड ने इनके घर पर हमला कर दिया और अब बस इनके चेहरों पर बेबसी ही है।
सूरजपुर जिले प्रतापपुर वन परिक्षेत्र के गाँव बंसीपुर में ये सबकुछ हुआ है। 19 अप्रेल को होने वाली बेटी की शादी के लिए पिता बुधराम ने सभी तैयारी कर रखी थी, तबाही बनकर आए हाथियों ने सब कुचल दिया। बेबस पिता के सामने अब अपनी बेटी के शादी की चुनौती है।
टूटे सामान के साथ बुधराम

पीड़ित ने बताया कि अब तक उसे वन विभाग की तरफ से किसी तरह की मदद की पेशकश नहीं की गई है। वन विभाग के लोग हालांकि मुआवजा दिलवाने के दावे कर रहे हैं। मजबूर पिता तय वक्त में ही बेटी को विदा करना चाहता है। अब किसान बुधराम गांव के लोगों के पास कर्ज मांगने भटक रहा है।
बेटी की शादी का कार्ड

सरकार का हाथियों को लेकर रूख

बीते शीत कालीन सत्र में वन मंत्री महेश गागड़ा ने कहा  कि प्रदेश के 17 जिले हाथी के उत्पात से प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों के उत्पात में 5 सालों में 199 लोगों की मौत हुई है, वहीं 7000 घर टूटे हैं। करीब 32 हजार 952 हेक्टेयर फसल का नुकसान हाथियों ने किया है। वहीं 39 करोड़ से ज्यादा की राशि मुआवजे के तौर पर दी गई है।

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