By मनोज यादव

कोरबा। पहले तो कोयला खदान के नाम पर जमीन छिन ली। इससे उऩके रोजी-रोटी पर आफत बन आई। इससे भी मन नहीं भरा तो अब विस्थापित किए बिना मुआवजा लेने जबरदस्ती दबाव बना रहे हैं। मामला जिले में एशिया के सबसे बड़े ओपन कोयला माइंस से सटे गांवों का है।

हमगांव के ग्रामीणों ने एसईसीएल प्रबंधन पर बसाहट की व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगाया है। बसाहट के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराने की वजह से उनके समक्ष एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। एसे अनेक गांव है, जिनके सामने यह समस्या उत्पन्न हो गई है।

एसईसीएल के विस्थापित अपने विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत है। खासकर नौकरी व बसाहट को लेकर प्रबंधन की वादाखिलाफी से परेशान हैं।

हमगांव निवासी जोधा बाई नामक वृद्ध महिला ने कहा कि बगैर बसाहट के मुआवजा राशि को लेने अधिकारी दबाव डाल रहे हैं।

इसी तरह अन्य प्रभावितों ने भी बताया कि उनकी जमीन भी चली गई है और नौकरी भी नहीं मिली है ऐसी स्थिति में उनके पास ना तो जमीन है ना ही नौकरी अब उनके सामने आर्थिक तंगी से गुजर ना पड़ रहा है।

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