नहीं रहे कड़वे प्रवचन से दुनिया में आदर्शों का रस घोलने वाले तरुण सागर महाराज

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रायपुर। अपने कड़वे प्रवचनों से पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज अब नहीं रहे। उन्होंने दिल्ली के शाहदरा के कृष्णानगर में शनिवार सुबह 3:18 बजे अंतिम सांस ली। मैक्स अस्पताल में पीलिया का 20 दिनों से इलाज करा रहे तरुण सागर की तबियत में सुधार नहीं हो रहा था। डॉक्टरों ने उन्हें इस बात की जानकारी दी तो उन्होंने आगे इलाज कराने से मना कर दिया और अपने अनुयायियों के साथ गुरुवार शाम कृष्णा नगर (दिल्ली) स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल आ गए।
बताया जा रहा है कि मुनिश्री अपने गुरु पुष्पदंत सागर महाराजजी की स्वीकृति के बाद संलेखना (आहार-जल न लेना) कर रहे थे। तरुण सागर महाराज जी के गुरु पुष्पदंत सागर महाराज जी ने भी एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने बताया कि उनके शिष्य की हालत गंभीर है। उन्होंने इस संबंध में एक पत्र भी लिखा। साथ ही, मुनिश्री सौरभ सागर और मुनिश्री अरुण सागर से दिल्ली पहुंचने और तरुण सागर जी की संलेखना में सहयोग करने के लिए कहा।

शिक्षा-दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई

जैन मुनि तरुण सागर का असल नाम ‘पवन कुमार जैन’ था। इनका जन्म 26 जून 1967, ग्राम गुहजी, जिला दमोह, राज्य मध्य प्रदेश में हुआ था। इनके माता-पिता का नाम शांतिबाई जैन और प्रताप चन्द्र जैन था। कहा जाता है कि इन्होंने 8 मार्च 1981 में घर छोड़ दिया था। इनकी शिक्षा-दीक्षा छत्तीसगढ़ में हुई। इनके प्रवचन की वजह से इन्हें ‘क्रांतिकारी संत’ का तमगा मिला। इन्हें 6 फरवरी 2002 को म.प्र. शासन द्वारा’ राजकीय अतिथि ‘ का दर्जा मिला। 2 मार्च 2003 को गुजरात सरकार ने उन्हें ‘राजकीय अतिथि’ के सम्मान से नवाजा। ‘तरुण सागर’ ने ‘कड़वे प्रवचन’ के नाम से एक बुक सीरीज स्टार्ट की, जिसके लिए वो काफी चर्चित थे।

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