रायपुर. जशपुर इलाके के ज्यादातर आदिवासी अब अपना कानून मानेंगे। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार को अब इनके इलाकों में दखल देने का कोई हक है। इसे लेकर इलाके के आदिवासी बाहुल इलाकों में अभियान चलाया जा रहा है इसे पत्थरगढ़ी का नाम दिया जा रहा है।
इस मुहिम के तहत जशपुर के गांवों में आदिवासी बड़े पत्थरों को लगाकर लिख रहे है, कि यहां देश में माना जाने वाला कानून नहीं चलेगा। इस गांव का अलग कानून और व्यवस्था है। खास बात ये है कि इन बातों के लिए ग्रामीण संविधान का हवाला दे रहे हैं। इन इलाकों में पांचवी अनुसूचित क्षेत्र का कानून चलने की बात कह रहे हैं।
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जशपुर से उठी बगावत की ये चिंगारी अब पूरे इलाके में फैल रही है। गांव में छोटी-बड़ी सभाएं की जा रही हैं और ग्रामीण खुद को मौजूदा प्रचलित लोकतांत्रिक व्यवस्था से अलग कर रहे हैं। अंबिकापुर में भी इसका ख़ासा असर दिख रहा है।

इन हालातों को लेकर प्रशासन क्या कर रहा है ये जानने
The Voices ने कलेक्टर प्रियंका शुक्ला से संपर्क करने की कोशिश की उन्होंने फोन काॅल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया। इससे प्रशासन की हालत का भी पता चलता है।
ये बातें लिख रहे ग्रामीण आदिवासी पत्थर के स्तंभों पर
– हम पर आईपीसी की धाराएं लागू नहीं होंगी
– विधान सभा, राज्य सभा में बना कानून हम पर लागू नहीं होगा
– जिसकी जमीन होगी खनिज उसका होगा
– लोक सभा ना विधान सभा सबसे उंची ग्राम सभा

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