कर्नाटक : पांच दिनों तक चला यूँ सियासी नाटक

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रायपुर। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कर्नाटक में पांच दिनों तक जोरदार सियासी नाटक चला। कर्नाटक की सियासी गतिविधियों पर पूरे देश की निगाह बानी रही। बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस के नेताओं के घरों, दफ्तरों से लेकर अदालत तक कर्नाटक की राजनीति से सम्बंधित गतिविधियां जारी रही।
सबसे पहले सियासी सरगर्मी 15 मई की शाम 5 बजे ही शुरू हुई, जब बीजेपी के पास सबसे ज्यादा सीटें आयीं और कांग्रेस, जेडीएस के पास कम। पहला मुकाबला राजनितिक दलों के बीच में राज्यपाल से मिलने के लिये आया।
इसी बीच कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन का ऐलान कर दिया और उन्होंने भी राज्यपाल से मिलकर बहुमत पेश करने का दावा सार्वजनिक किया।
इसके बाद, इस बात पर सियासत शुरू हुई कि राज्यपाल किसे पहले बुलाएं। राज्यपाल ने बीजेपी को पहले बुलाया। यह बात अदालत तक पहुंची।
सियासी नौटंकी इसके बाद भी जारी रही। कांग्रेस और जेडीएस के नेता आरोप लगाते रहे कि बीजेपी विधायकों को खरीदने को कोशिश कर रहे हैं।
इसके साथ साथ रिसोर्ट पॉलिटिक्स भी जारी रहा। विधायकों को होटलों और रिसॉर्ट्स में छुपाया गया। ताकि वे पाले न बदल दें।
सियासी नौटंकी यहाँ भी नहीं थमी। सुप्रीम कोर्ट और राज्यपाल के निर्देश पर बीजेपी ने प्रोटेम MLA नियुक्त किया, तो उस नियुक्ति को भी गलत ठहराने के लिए राजभवन से लेकर अदालत तक बहस जारी रहा।
तमाम नौटंकी का नतीजा यही रहा कि 19 मई येदियुरप्पा को बहुमत की कमी के कारण इस्तीफ़ा देना पड़ा, इधर जेडीएस-कांग्रेस सरकार बनाने की तैयारी में हैं।

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