एक मछली ने दो मछुआरे भाइयों को बना दिया लखपति, जानिए कैसे?

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रायपुर। अगर हम मार्केट में मछली लेने जाएंगे तो ज्यादा से 300-400 रुपये किलो मछली आसानी से मिल जाती है। लेकिन एक मछली किसी को लखपति बना दे तो अचरज होना स्वभाविक है। मगर दो मछुआरे भाइयों के साथ एसा हुआ है। एक ही दिन में दोनों भाई लखपति बन गये। उनके जाल में घोल मछली फंस गई और यह मछली 5.5 लाख रुपये में बिकी।
मुंबई तट पर मछुआरा महेश मेहर और उसका भाई भरत समुद्र में अपनी छोटी सी नाव से मछली पकड़ने गए थे। जब वे मुर्बे तट पर पहुंचे तो उनका जाल भारी हो गया। वे समझ गए कि जाल में मछली फंस गई है। उन्होंने देखा तो यह घोल मछली थी। मछली का वजन लगभग 30 किलोग्राम था।
घोल मछली पकड़ने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। सोमवार को जब तक वे समुद्र के किनारे पहुंचते किनारे पर व्यापारियों की लंबी लाइन लगी थी। दोनों के आते ही घोल मछली की बोली शुरू हुई। बीस मिनट में यह बोली खत्म हो गई और इसे 5.5 लाख रुपये में एक व्यापारी ने खरीद लिया।
दवाई कंपनियां भी करती हैं इस्तेमाल
घोल मछली की स्किन में उच्च गुणवत्ता वाला कोलेजन (मज्जा) पाया जाता है। इस कोलेजन को दवाओं के अलावा क्रियाशील आहार, कॉस्मेटिक उत्पादों को बनाने में प्रयोग किया जाता है। बीते कुछ वर्षों में इन सामग्री की वैश्विक मांग बढ़ रही है। यहां तक कि घोल का महंगा कमर्शल प्रयोग भी होता है। उदाहरण के तौर पर मछली के पंखों को दवा बनाने वाली कंपनियां घुलनशील सिलाई और वाइन शुद्धि के लिए इस्तेमाल करती हैं।

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