रायपुर। संजीवनी एंबुलेंस और महतारी एक्सप्रेस जैसी सेवा के संचालन को सीधे सरकार के अधीन करने की मांग को लेकर पिछले 40 दिनों से आंदोलन करने वालों कर्मचारियों के हड़ताल के खत्म होने की असली वजह अब सामने आ रही है।
अभी तक ऐसा लग रहा था कि आमतौर पर मिलने वाले साधारण आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल को खत्म कर दिया है, लेकिन छत्तीसगढ़ 108-102 कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष राजेंद्र राठौर ने खुलासा किया है कि इस हड़ताल के खत्म होने की असली वजह आखिर क्या है?
प्रांताध्यक्ष राठौर ने बताया कि ‘आंदोलन के 40 दिनों के दौरान हमने तमाम तरह के प्रदर्शन किए, जिसमें सामान्य प्रदर्शन के अलावा रक्तदान, नेत्रदान, मुंडन संस्कार, अर्धनग्न प्रदर्शन और आमरण अनशन भी शामिल थे।
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान सरकार की तरफ से कोई खास प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन जैसे ही 40 दिन पूरे हुए तो 41वें दिन स्वास्थ्य विभाग और कुछ जनप्रतिनिधियों की सकारात्मक प्रतिक्रियाएं हम तक पहुंचना शुरू हो गईं।’
राठौर ने आगे बताया, ‘इसी कड़ी में स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर, स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक आर.प्रसन्ना और राजनांदगांव के पूर्व सांसद तथा वर्तमान महापौर मधुसूदन यादव के साथ कर्मचारियों की बेहद सकारात्मक बातचीत हुई।’
राठौर ने बताया, ‘सबसे खास बात यह रही कि इस बातचीत में कर्मचारियों को साधारण आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस आश्वासन दिया गया है, कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा और यह भी ठोस आश्वासन दिया गया है कि कर्मचारियों की मांगों पर समय रहते हुए ही फैसला ले लिया जाएगा।’
इसी ठोस आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल को समाप्त करने की घोषणा की। छत्तीसगढ़ 108-102 कर्मचारी कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष राजेंद्र राठौर ने आंदोलन की इस सफलता के लिए सभी कर्मचारी साथियों, मीडिया, जनप्रतिनिधि और राज्य सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
गौरतलब है कि जीवीके कंपनी के अधीन काम करने वाले इन कर्मचारियों ने अपनी मांगों में कई मुद्दों को शामिल किया है। जिनमें स्वास्थ्य सेवाओं में ठेका प्रणाली की समाप्ति, एंबुलेंस जैसी सेवाओं को सीधे सरकार के अधीन करने, जीवीके कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग के किसी भी परियोजना में मर्ज करने तथा कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतनमान देने जैसी मांगे शामिल हैं।

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