‘बंसती’ शांत होकर लौटी, लेकिन अब जोरदार दहशत, खटाल में ठहरा पूरा गांव  

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By मनोज यादव
कोरबा। ‘वीरू’ की मौत के बाद लगभग 24 घंटे तक तो उसका पोस्‍टमार्टम ही नहीं हो सका, क्‍योंकि ‘बसंती’ चिंघाड़ मारते हुए शव के पास ही बैठी थी। दहशत के मारे लोग नजदीक नहीं जा पा रहे थे। वनविभाग की टीम, पुलिस और डीएफओ, यहां तक की कलेक्‍टर तक को भी वहां काफी देर तक रूकना पड़ा था।
बहरहाल, दूसरे दिन जब मादा हाथी बसंत शांत होकर बेला गांव की जंगल की तरफ गई, तब नर हाथी वीरू का पोस्‍टमार्टम किया गया।
लेकिन, अब वहां के हालात और भी ज्‍यादा दहशतजदा हो गए हैं। एक हाथी की मौत के बाद यह आशंका बनीं रहती है कि जंगल से हाथियों का पूरा समूह दोबारा गांव में पहुंचता है और जमकर आंतक मचाता है। The Voices ने उस बेला गांव में जाकर ग्रामीणों की दशा देखी और वहां के हालात का मुआयना किया।

दरअसल, हाथियों के दोबारा आने के संभावित खतरे को देखते हुए वन विभाग ने बस्ती को वहां से हटा दिया है, ग्रामीणों को खटाल में रखा गया है। वहां 70-80 महिला, पुरुष और बच्चे ठहरे हुए हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग तार भी लगा दिया गया है।

ग्रामीण बाबूलाल ने बताया कि पूरी रात दहशत में गुजारनी पड़ती है। कब, क्या हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। 80 लोगों के सोने के लिए यहां पर्याप्त जगह नहीं है। इसलिए यहां के आधे सदस्य खड़े रहते हैं। हाथी के भय से जो सोए रहते हैं, उनकी भी नींद दूर रहती है। धनेश्वरी यादव ने बताया कि हाथी से बचने झटका करंट लगाया गया है, लेकिन इसके बाद भी भय बना हुआ है।
बहरहाल, वनविभाग और प्रशासन हाथियों के आंतक से ग्रामीणों को मुक्ति दिलाने के लिए अपनी तरफ से कोशिशें तो कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां दहशत कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

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