रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के एक खास तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला आया है। इस फैसले के मुताबिक, अंजलि जैन (23 वर्ष) अपने पति के साथ नहीं, बल्कि अपने माता-पिता के साथ रहेगी, क्‍योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अंजलि जैन की ईच्‍छा के संबंध में उनसे पूछताछ की है। अंजलि की ईच्‍छा के अनुरूप ही सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है।
अंजलि जैन के पति इब्राहिम सिद्दीकी ऊर्फ आर्यन आर्य ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर 27 अगस्‍त को अंतिम सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया है।
मामला छत्‍तीसगढ़ के धमतरी का है। यहां रहने वाले इब्राहिम की दो सालों से अंजलि के साथ जान-पहचान थी। गत 25 फरवरी 2018 को दोनों ने रायपुर के आर्य मंदिर में शादी कर ली। इस शादी की खबर जैसे ही अंजलि के परिजनों तक पहुंची, उन्‍होंने अंजलि को अपने कब्‍जे में रखा और इब्राहिम से मिलने-जुलने से रोका।
इब्राहिम ने बिलासपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्‍यक्षीकरण याचिका दायर करते हुए अंजलि जैन लौटाने की मांग की।
हाईकोर्ट ने इस याचिका के आधार पर अंजलि जैन को सोच विचार करने का समय देते हुए कहा, कि वे छात्रावास या अपने माता-पिता के साथ रह सकती हैं। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दी।
इसके बाद इब्राहिम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा, कि उनकी बालिग पत्‍नी को उनके पास रहने दिया जाए, क्‍योंकि उनकी सहमति से ही यह शादी हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अं‍ज‍लि की ईच्‍छा के संबंध में उनसे पूछताछ की, फिर फैसला दिया कि अंजलि अपने माता-पिता के साथ रहेगी।
इब्राहिम का कहना है, ‘ मैंने अंजलि की मर्जी से ही उनके साथ शादी की थी। शादी के लिए ही अपना धर्म बदलकर हिंदू धर्म अपनाया था और अपना नाम बदलकर आर्यन आर्य रख लिया था। अंजलि की सहमति पर ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन अचानक ऐसा फैसला आ गया, जिसकी मुझे उम्‍मीद नहीं थी।

(फोटो साभार – सीजी खबर)

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