पद्मश्री सुरेंद्र दुबे बोले- मोर करा कोनो काम नहीं है, अपन जिंदा होने के सबूत ला देवत हू

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सुमन पांडेय

रायपुर. बीती रात से पद्मश्री कवि डॉक्टर सुरेंद्र दुबे की मौत की खबर ने सभी को हिलाकर रख दिया. सबके जहन में वह कविताएं उमड़ने लगी जिन्हें छत्तीसगढ़ी अंदाज में सुरेंद्र दुबे ने सुनाया था और लोगों को लोटपोट किया था. मगर हमेशा की तरह एक बार फिर से यह खबर अफवाह निकली दरअसल. राजस्थान के हास्य कवि सुरेंद्र दुबे की मौत हुई है. नाम और प्रोफेशन एक जैसे होने की वजह से यह कंफ्यूजन क्रिएट हुआ.

The Voices से बात करते हुए छत्तीसगढ़ के कवि पद्मश्री डॉक्टर सुरेंद्र दुबे ने पहले अल्फाजों में ही कहा कि यार जिंदा हूं मैं… उन्होंने बताया कि दरअसल राजस्थान के ब्यावर के रहने वाले सुरेंद्र दुबे की मौत हुई है. किसी ने Facebook पर उनकी मौत के निधन समाचार डालते हुए मेरी तस्वीर लगा दी थी. इसके बाद से यह शुरू हुआ हालांकि उस व्यक्ति ने सुधार करते हुए तस्वीर को बदला था. अपने फनी अंदाज में सुरेंद्र दुबे ने कहा अब कल रात से मोर करा कोनो काम नहीं है अपन जिंदा होने के सबूत ला देवत हू.

राजस्थान के कवि सुरेंद्र दुबे के बारे में छत्तीसगढ़ के कवि सुरेंद्र दुबे ने कहा हम दोनों दोस्त हैं कई मंजू पर एक साथ काव्य पाठ किया है तकरीबन 12 साल पहले रायपुर के राठौर चौक में हम दोनों ने साथ में काव्यपाठ किया था. उन्हें याद करते हुए कवि ने कहा कि वह गोरे थे मैं काला था ऐसे में हमेशा लोग हमें यह कहकर चिढ़ाते थे कि सुरेंद्र दुबे कवि कौन से गोरे वाले या काले वाले. मुझे छत्तीसगढ़ का ब्लैक डायमंड कहते थे तो उन्हें राजस्थान का वाइट डायमंड

राजस्थान के कवि सुरेंद्र दुबे के निधन पर छत्तीसगढ़ के सुरेंद्र दुबे की यह पंक्तियां

राजस्थान का हंसी ठहाका,
देश-विदेश में गूंज रहा था।
कविता की नई परिभाषा को वह अपने शब्दों से चूम रहा था।
मेरा मित्र विधा का था,
और हम दोनों संग-संग गाते थे,
खुशी रहती थी इतनी हमको जन-जन भी मुस्कुराते थे।।

अफवाह पर बोले कवि सुरेंद्र दुबे

31 की रात में मुंबई में कार्यक्रम देने गया था इसके बाद फोन को बंद कर दिया था इसके बाद यह अफवाह फैली और अब एक हजार से ज्यादा फोन मेरे पास आ चुके हैं और सभी को मैं अपने जिंदा होने का सबूत दे रहा हूं.

अपनी मौत की ख़बर पर उन्होंने The Voices के लिए लिखा

छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ लोगों की दुआएं मेरे साथ हैं
मैं मंच का कवि बाद में जन-जन का कवि पहले हूं
उन दिलों में मैं कभी मरूंगा नहीं, क्योंकि ऐसा काम कभी करूंगा नहीं.

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