गरियाबंद के इस गांव के घरों में बन रही यूरिया मिली शराब, खेत में छुपाकर हो रही सप्‍लाई

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परमेश्वर कुमार साहू
गरियाबंद। जमाही, छुईहा, फुलझर, खदराही, धुरसा, जोगीडिपा, कुण्डेल ये वो नाम हैं जहां घरों में महुए से शराब बनाई जा रही है। खेतों, जंगलों और झाडि़यों में शराब का स्‍टॉक छुपा कर रखा जाता है, इसके बाद मयखाने सजते हैं। महुए को शराब बनाने के लिए 7 दिनों तक सड़ाना पड़ता है। ऐसे में मुनाफाखोर यूरिया से 1 ही दिन महुए को सड़ा कर जहरीली शराब तैयार कर बेच रहे हैं।
खास बात ये है कि इतने सारे गांवों में ये हो रहा है और प्रशासन लापरवाह है। महुए में एक एक बडे टेबलेट जैसे पदार्थ को डालकर ये शराब बनाई जा रही है। इस शराब को कोचिए 30-30 रुपये व 100 रुपये के पाउच में बेच रहे हैं। गांव की दुकानों में अब शराब में डलने वाला कैमिकल भी मिल रहा है।
आलम ये है कि यहां बड़ा वर्ग नशे की लत में डूब चुका है। लोगों ने इसकी शिकायत भी थाने में की है। फिंगेश्वर थाना प्रभारी संतोष सिंह ने इस मामले पर कहा कि जल्‍द मामले में गिरफ्तारियां होंगी।

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