साक्षर भारत कार्यक्रम बंद, बेराजगार प्रेरकों ने सरकार से कहा हमें शिक्षाकर्मी बनाइए

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परमेश्‍वर साहू
गरियाबंद। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2018 से साक्षर भारत कार्यक्रम को बंद कर दिया है।  ऐसे लोग जो इस कार्यक्रम के तहत गांव में लोगों को साक्षर बनाने का काम करते थे वो अब दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं, इन्‍हें प्रेरक कहा जाता है।
प्रेरकों के सामने अब रोजी और रोजगार की दिक्‍कत है। वो हड़ताल के जरिए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें उन्‍हें कामयाबी नहीं मिल रही। वही छुरा मे 120 प्रेरक तो गरियबंद जिले मे लगभग 540 प्रेरक नियुक्त हैं। राज्य मे 16,840 प्रेरक है। जिला प्रेरक कल्याण संघ के अध्यक्ष अशोक साहू ने कहा है की समय रहते हमारी मांग को पूरा नही किया गया तो उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
प्रदेश के प्रेरक चाहते हैं कि उन्‍हें नियमित किया जाए। ,15 हजार तक वेतन दिया जाए और सीएम डॉ. रमन सिंह की चुनावी घोषणा के मुताबिक प्रेरकों को शिक्षाकर्मी का दर्जा दिए जाने की मांग पर रार मचा हुआ है।

हर पंचायत में दो प्रेरक नियुक्त किये थे। जिसमे एक महिला व एक पुरुष प्रेरक शामिल है। महज 2000रु प्रति माह के मानदेय पर इन प्रेरकों को सिर्फ लोगों को साक्षर करना ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री बीमा योजना ,स्वच्छ भारत मिशन ,कौशल विकास योजना,मतदाता सूची मे नाम जोडना,जनधन खाता खुलवाने जैसे दर्जनों काम करने पड़ते हैं।

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