SPG की ये युनिट देती है राहुल को सुरक्षा, 850 गोलियां एक मिनट में फायर करती है इनकी बंदूक, पीएम मोदी के पास भी ऐसे ही कमांडो

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सुमन पांडेय्
रायपुर। कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी रायपुर पहुंचे उनके साथ स्‍पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप की स्‍पेशल यूनिट के कमांडो भी थे। आंखों में काला चश्‍मा, ब्‍लैक बॉडी आर्मर पहने और हाथों में एफएनएफ रायफल। राजधानी के लिए इनका लुक हॉलीवुड फिल्‍मो में दिखने वाले कमांडोज से कम ना था। असल में इनका एक्‍शन भी हॉलीवुड फिल्‍मों जैसा ही होता है। जानिए इन स्‍पेशल यूनिट कमांडोज के बारे में।
स्‍पेशल प्रोटेक्‍शन ग्रुप SPG वो दस्‍ता है जो देश के चंद ही वीआईपीज़ को सुरक्षा देता है। इनके कमांडोज एल्बो और नी गार्ड पहनते है। जूते भी इस तरह बने होते हैं कि किसी भी जमीन पर फिसले नहीं। सभी कमांडो डिजिटल वॉच और दस्‍ताने पहने हुए होते हैं। दस्‍तानों की मदद से ये कहीं भी क्‍लाइंब कर सकते हैं।
आंखों में पहने जाने वाला चश्मा भी इस तरह बना होता है कि लड़ाई के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो। इनके पास एफएनएफ-2000 असॉल्ट रायफल, होती है जो 1600 फिट दूर खड़े दुश्‍मन को मार गिराती है। एक मिनट में ये गन 850 राउंड फायर कर सकती है।
 जांघ के पास खतरनाक 17 एम पिस्तौल होती है। अगर किसी सूरत में हाथों से लड़ना पड़े तो कमर के पास चाकू भी लगा होता है। मार्शल आर्ट में माहिर ये कमांडो दुश्‍मन को चित करके ही दम लेते हैं। सभी कमांडो इयरपीस की मदद से एक दूसरे से कनेक्‍टेड रहते हैं।
कब हुआ गठन
एसपीजी का गठन 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ था। इससे पहले दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल सेल प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात रहती थी। जिसके चारों तरफ एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) की एक टीम घेरा बना कर रखती थी।

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