रायपुर. मंगलवार को छत्तीसगढ़ की संस्कृति का चेहरा मानी जाने वाली लिविंग लिजेंड तीजन बाई ने अपना जन्म दिन मनाया। सूबे के मुख्यमंत्री डाॅ रमन सिंह समेत हर आम और खास ने उन्हें उनके जन्मदिन पर बधाई दी। इस मौके पर The Voices से एक्सक्लूसिव बातचीत में छत्तीसगढ़ की लिविंग लीजेंड ने अपनी यादें और भविष्य की योजनाएं शेयर कीं।
माँ कहती थी खाएगी नही तो गाएगी कैसे?
अपने बचपन को याद करते हुए तीजन बाई बताती हैं, जिन दिनों मुझ पर पंडवानी सीखने का जुनून सवार था, सामाजिक बंदिशों के चलते माँ की डांट खानी पड़ती थी। तीजन बाई याद करते हुए कहती हैं- “माँ पंडवानी गाने से रोका करती थी, फिर भी जब मैं उसकी बात नहीं मानती थी तो मुझे एक कमरे में बंद कर खाना देने से इनकार कर देती थी। वो कहती थी खाएगी नही तो गाएगी कैसे?” उसे मेरी चिंता थी लेकिन मैं भी धुन की पक्की थी, इतना कह कर तीजन हंसने लगती हैं।
तीजन कहती हैं- पंडवानी को लेकर कभी कुछ भी नहीं बदला, आज भी पहले की ही तरह कार्यक्रम प्रस्तुत करती हूं। मुझे चाहने वाले भी पहले की तरह ही हैं वो भी नहीं बदले हैं। एक बार मंच पर पहुंचने के बाद कभी कोई समस्या नही आई। पंडवानी की विरासत को आगे ले जाने के लिये दो बच्चों को सिखा भी रही हूँ।
पंडवानी ही मेरी राजनीति है
यह पूछे जाने पर की आने वाले दिनों में अगर किसी पार्टी की तरफ से मौका मिले तो राजनीति में आएंगी, तीजन बाई कहती हैं “ये पंडवानी ही मेरी राजनीति है, इसके अलावा मेरे जीवन में कोई दूसरी नीति नही है।”
अपने नाना बृजलाल से मिली पंडवानी की विरासत को दुनिया में मशहूर करने वाली तीजन ने कहा “पंडवानी की विरासत को आगे ले जाने के लिये दो बच्चों को सिखा भी रही हूँ।” अपने प्रशंसकों को अपना संंदेश देते हुए तीजन कहती हैं- मैं अपनी जिंदगी से खुश हूँ और चाहती हूँ कि प्रदेश में भी खुशहाली रहे।

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