गजब: एक मिनट में वाशिंगटन से टोक्यो की स्पीड से सूरज को छूने उड़ा नासा का ये यान

0
62
रायपुर। डेल्टा-IV हेवी रॉकेट की मदद से पार्कर सोलर प्रोब को रविवार को प्रक्षेपित किया गया। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने पार्कर सोलर प्रोब यान को लॉन्च कर दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह सूरज के सबसे नज़दीक पहुंचने वाला अंतरिक्ष यान होगा। सूरज से 15 करोड़ किमी दूर पृथ्वी से निकला ये यान सूरज की सतह से 61 लाख किमी की दूर तक पहुंचेगा। इतिहास में अब तक कोई भी अंतरिक्ष यान सूरज के इतने क़रीब नहीं पहुंचा है। यह दूरी उतनी नज़दीक नहीं लगती लेकिन यदि यह मान लें कि सूरज और पृथ्वी के बीच दूरी केवल एक मीटर है तो पार्कर सोलर प्रोब सूरज से केवल चार सेंटीमीटर की दूरी पर होगा।
पार्कर प्रोब को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला डेल्टा-IV हेवी रॉकेट स्थानीय समय के अनुसार सुबह 3.31 बजे छोड़ा गया. भारतीय समय के अनुसार रविवार दोपहर 1 बजे. नासा सन ऐंड स्पेस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

see video:

सात सालों में ये यान सूरज के 24 चक्कर लगाएगा

यह इतिहास का सबसे तेज़ गति से चलने वाली मानव निर्मित वस्तु है। यह ऐसा पहला अंतरिक्ष यान है जिसे जीवित व्यक्ति 91 वर्षीय खगोलशास्त्री यूजीन पार्कर के नाम पर रखा गया है जिन्होंने सबसे पहले सौर हवा का वर्णन किया था। पार्कर ने इस लॉन्च पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘वॉउ, यह हम चले! अगले कई सालों तक हम कुछ सीखेंगे।’ सात सालों के दरम्यान यह यान सूरज के 24 चक्कर लगाएगा। नासा के इस मिशन का उद्देश्य कोरोना के पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है। इस अध्ययन से पृथ्वी पर पड़ने वाले इसके असर का पता लगाया जा सकता है। इस मिशन का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि ऊर्जा और गर्मी किस प्रकार सूर्य के चारों ओर अपना घेरा बनाकर रखने में कामयाब होती हैं। यह सबसे तेज़ गति से चलने वाला मानवनिर्मित वस्तु होगा जो 6 लाख 90 हज़ार किलोमीटर की गति से सूरज का चक्कर लगाएगा।

190 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार

इसका वज़न करीब 612 किलो है। जबकि इसकी लंबाई 9 फ़ीट 10 इंच है। सूरज की गर्मी से बचाने के लिए इसमें 11.43 सेंटीमीटर मोटी स्पेशल कार्बन कंपोजिट हीट शिल्ड लगाई गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस शिल्ड को 1300 डिग्री सेल्सियस तापमान का सामना करना पड़ेगा। यह यान अधिकतम 190 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से सूरज के चक्कर लगाएगा। यह गति कितनी तेज़ है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस चाल से वाशिंगटन से टोक्यो पहुंचने में केवल एक मिनट का वक्त लगेगा। इससे पहले 1976 में ‘हिलियस-2’ नाम का अंतरिक्ष यान सूरज के पास पहुंचा था। तब इस यान की सूरज से दूरी 430 लाख किलोमीटर थी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.