हितेश शर्मा

दुर्ग. अब तक आपने कई बैंक देखे होंगे जो लोगों को सुरक्षित पूंजी निवेश की सुविधा देते हैं. लेकिन क्या आपने ऐसा बैंक देखा है जो केवल आधी आबादी के लिए कार्य कर रहा है. भिलाई के इस बैंक की जिसके कारण रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी इसे लिटिल बट स्ट्रांग का नाम दिया है.

कितना अलग है यह बैंक

लगभग 20 हजार एकाउंट होल्डर्स और तकरीबन 350 करोड़ के करीब का सालाना टर्न ओवर, खुद का एटीएम, तकनीक के मामले में भी बेमिसाल. 22 साल पुराने इस बैंक की खासियत ये है कि ये बैंक केवल महिलाओं के द्वारा महिलाओं के लिए महिलाओं के सहयोग से संचालित होता है.

समाज में महिलाओं की स्थिति और उनकी आर्थिक परेशानियों को देखते हुए कुछ घेरलू कामकाजी महिलाओं ने महिला स्वाभिमान ओर महिला सशक्तिकरण के लिए एक योजना बनाई.

25 जनवरी 1996 को मात्र 15 महिलाओं ने 15 लाख की जमा पूंजी से बैंक शुरू किया. इस दिन इन घरेलू महिलाओं ने प्रगति महिला नागरिक सहकारी बैंक की नींव रखी. शुरुआती दौर में कई तरह की परेशानियां आई, लेकिन इन महिलाओं ने हार नही मानी. आज के इस बैंकिंग कॉम्पिटिशन के जमाने मे खुद को साबित करने की चुनौती उनके सामने मुंह बायें खड़ी थी. लेकिन बैंकिंग के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने की ठान चुकी ये महिलाएं आखिरकार कामयाबी के रास्ते पर चल निकाली.

इनके हौसले की उड़ान को देखते हुए 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इन्हें बेस्ट कॉपरेटिव सोसायटी का अवार्ड दिया. छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी महिला बैंक को यह सम्मान मिला.

वर्तमान में इस बैंक का डिपॉजिट 124 करोड़ रुपये है, तो वहीं अंश पूंजी 3 करोड़ 18 लाख, कार्यशील पूंजी 161 करोड़ और बैंक के सदस्यों की संख्या 5211 है.

इस महिला बैंक को छत्तीसगढ़ का ऐसा पहला सहकारी बैंक होने का गौरव प्राप्त है, जो अपने ग्राहकों को ATM, RTGS / NEFT, SMS अलर्ट और CTS चेक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है. दुर्ग जिले का ये महिला बैंक महिला सशक्तिकरण के लिए मिसाल बन चुका है.

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